'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' के नए एपिसोड में हैरान करने वाले नाटक देखने को मिलेगा। नंदिनी कहती है कि तुलसी के साथ उसका रिश्ता खत्म हो गया है, इसलिए अब वह विरानी परिवार या शांतिनिकेतन में घटने वाली किसी भी दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नहीं है। वहीं दूसरी ओर, तुलसी जेल की कोठरी में बंद है। जेल के अंदर काफी दबदबा रखने वाली एक कैदी वहां की दूसरी कैदी से तुलसी के अतीत के बारे में सब कुछ पता लगाने के लिए कहती है। उसी रात तुलसी की कोठरी में रहने वाली दूसरी कैदी एक चूहे को देखकर चौंक जाती है। इस दौरान एक और कैदी अंदर आती है। जेल की सबसे खूंखार कैदी तुलसी की गर्दन पर चाकू रखती है और उसे अपने ही बेटे और अब अपने पोते की हत्या के लिए ताने मारती है।
जेल में तुलसी को मिली धमकी
तुलसी कोई जवाब नहीं देती है, जब उसे कहीं और सोने के लिए कहा जाता है तो वह चुपचाप दूसरी जगह चली जाती है। इस घटना से उसकी वो दर्दनाक यादें ताजा हो जाती हैं, जब करण ने उसे बुरी मां कहा था और अपने बेटे की मौत के लिए उसे दोषी ठहराया था। जेल में तुलसी को धमकियां भी दी जाती है कि अगर उसने जेल के बाहर किसी को कुछ भी बताया तो उसके साथ अच्छा नहीं होगा। 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' के अपकमिंग एपिसोड में अभी कई तरह के ड्रामे देखने को मिलने वाले हैं।
वैष्णवी की जिंदगी बनी नर्क
दूसरी तरफ, वैष्णवी रो पड़ती है। उसकी सहेली उसकी परेशानी को भांप लेती है और पूछती है कि क्या हुआ है। वैष्णवी उसे बताती है कि पार्थ ने उसे किन हालात से गुजरने पर मजबूर किया था। वह बताती है कि वह बेहोश हो गई थी और उसे याद नहीं कि उसके बाद क्या हुआ। उसकी सहेली उसे सच का पता लगाने के लिए कहती है। अगले दिन वैष्णवी जेल में तुलसी से मिलने जाती है। वह तुलसी से सच बताने की गुजारिश करती है और पूछती है कि क्या सच में उसी की वजह से पार्थ की मौत हुई थी, लेकिन तुलसी अपना बयान बदलने से मना कर देती है। तुलसी वैष्णवी से शांतिनिकेतन का ध्यान रखने के लिए कहती है, लेकिन वह कहती है कि घर में हर कोई उसे नफरत की नजर से देखता है।
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